
पूरे विश्व में लोग अपने-अपने रीति-रिवाज और त्योहारों को अपने दंग से मनाते हैं लेकिन साउथ अफ्रीका में तो बहुत ही अनोखा और दर्दनाक त्योहार मनाया जाता है, जिसे खतना मौसम कहते हैं। इसमें कई लड़कियों का जबरन खतना कर दिया जाता है।
अफ्रीकी देशों के जनजातीय मुखियाओं का दावा है कि जिन लड़कियों का खतना नहीं होता है, वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाती हैं। इस प्रथा की शिकार करीब सात लाख लड़कियां यूरोप में रहती हैं। ब्रिटेन में ऐसी लड़कियों की संख्या 1 लाख 40 हजार हैं और फ्रांस में भी एक लाख लड़कियां रहती हैं।
अफ्रीका के कई देशों इस प्रथा को अवैध करार दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद इस प्रथा के समर्थकों, प्रचारकों का कहना है कि इस बात की कोई उम्मीद नहीं है कि पश्चिमी देशों ने नेता उन्हें ऐसा करने से रोक सकेंगे। इस प्रथा का विरोध करने वाली एक सुपरमॉडल ने साहस का परिचय देते हुए बताया कि इस प्रथा के अनुरूप उनके जननांग को काटकर सिल दिए जाने का उन पर जीवन भर प्रभाव रहा। वे इसे 'बाल उत्पीड़न' और 'लैंगिकवादी' प्रथा करार देती हैं।
खतना से पीड़ित लगभग यूरोप में 7 लाख लड़कियां रहती हैं, एक लाख अमरीका और और फ्रांस में भी। इस काम के विरोध में खड़े होने वाले ईस्टर ओगेटो का कहना है कि उन्होंने देखा है कि जिस लड़की का खतना कर दिया जाता है, उसे शादी के दौरान लड़के भी मिल जाते हैं। साथ ही मेंदहेज और गाय भी लेकिन जिसका खतना न हुआ हो, उन लड़कियों को लड़के नहीं मिलते। फिलहाल इसका विरोध दुनिया के कई हिस्सों से जारी है।
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